Ease of doing business index 2019

भारत में बिजनेस करना हुआ और आसान, ईज ऑफ डूइंग रैकिंग में 77वें नंबर पर पहुंचा देश !

कारोबार करने में सहूलियत यानी ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर विश्व बैंक ने 31 अक्टूबर 2018 को अपनी रेंटिंग जारी की. इस वर्ष की रेंटिंग में भारत की रैंकिंग में 23 अंकों का सुधार हुआ है. भारत इसमें 100वें पायदान से चढ़कर अब 77वें पायदान पर पहुंच गया है. भारत ने वर्ष 2017 की रेंटिंग में दुनियाभर के 189 देशों में 100वां स्थान हासिल किया था. इस साल छह मानकों में भारत की रैकिंग में सुधार हुआ है.

विश्व बैंक की रेंटिंग के मुताबिक दो साल में इस रैकिंग में भारत को 53 अंकों की उछाल मिली है, जबकि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले चार साल में 65 अंकों का उछाल आया है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकारी कार्यप्रणाली सहित कई आर्थिक सुधार किये हैं. इस सुधारों के कारण ही देश की अर्थव्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है.

दक्षिण एशिया के देशों में भारत इसमें पहले स्थान पर है, जबकि इससे पहले की रैंकिंग में भारत छठे नंबर पर था. वहीं ब्रिक्स देशों में भारत तीसरे स्थान पर है, जबकि पहले पांचवें स्थान पर था.

‘ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस’: एक दृष्टि

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (कारोबार करने में सहूलियत) का मतलब होता है किसी भी देश में कारोबार कितनी सरलता से शुरू किया जा सकता है.
  • विश्व बैंक वर्ष 2003 से हर साल ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस वाले देशों की सूची जारी करता है. इसमें वह 10 पैमानों पर 190 देशों की रैकिंग तय करता है.
  • जिन 10 पैमानों के आधार पर देशों की रैंक तय की जाती है वे हैं- बिजली कनेक्शन, कॉन्ट्रैक्ट लागू करना, बिजनेस शुरू करना, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, दिवालिया शोधन प्रक्रिया, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, इन्वेस्टर्स के हितों की रक्षा, टैक्स पेमेंट और विदेशों में ट्रेड शामिल हैं. एक 11वां पैमाना ‘श्रम बाजार के नियम’ भी होता है लेकिन देशों की रैंकिंग तय करते समय इसके मूल्य को नहीं जोड़ा जाता.
  • विश्व बैंक यह रैंकिंग तय करने के लिए 10 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले देशों के मामले में दो व्यापारिक शहर से डाटा लेता है. उदाहरण के लिए विश्व बैंक जब भारत की रैंक तय करता है तो वह दो शहरों मुंबई और दिल्ली से इन पैमानों पर आंकड़े जुटाता है.
  • किसी देश के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग बेहद महत्वपूर्ण है. बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसी देश में निवेश से पहले वहां की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर निर्णय लेती हैं.

 

रेटिंग की बड़ी बातें

  • विश्व बैंक द्वारा जारी इज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की रैंकिंग 77 वें पायदान पर पहुंचा

  •  पिछले साल 2017 के मुकाबले 2018 में भारत की रैंकिंग में 23 स्थान का सुधार

  • 190 देशों की रैंकिंग में भारत 77 वें स्थान पर

  • पिछले 2 साल में 53 रैंक और 2014-18 में 65 रैंक का सुधार

  •  पिछले साल भी 30 पायदान ऊपर आया था भारत की रैंकिंग

  • 10 मापदंडों में से 6 मापदंडों में भारत की स्थिति में सुधार देखा गया

  • कंस्ट्रक्शन परमिट,सीमाओं में व्यापार,व्यवसाय की शुरुआत, क्रेडिट लेने,बिजली लेने जैसे 6 मापदंडों में बड़ा सुधार

  • विश्व बैंक ने माना है कि व्यवसाय करने के मामले में भारत सुधार करने वाले शीर्ष देशों में शामिल

  • ब्रिक्स और दक्षिण एशियाई देशों में भारत टॉप इम्प्रूवर

  • 2014 में भारत दक्षिण एशियाई देशो में भारत की स्थिति 6वें  स्थान पर था आज पहले पायदान पर पहुंच गया है.

     

    किस आधार पर तय होती है रिपोर्ट- 

    भारत ने 2003 से अब तक 37 बड़े सुधार लागू किए हैं. पिछले साल इस रिपोर्ट में दिल्ली और मुंबई को शामिल किया गया था. रिपोर्ट में किसी कारोबार को शुरू करना, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स देना, विदेशों में ट्रेड, कॉन्ट्रैक्ट लागू करना और दिवालिया शोधन प्रक्रिया को आधार बनाया जाता है.

    ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में न्यूजीलैंड टॉप पर है. उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का नंबर आता है. इस लिस्ट में अमेरिका आठवें, चीन 46वें और पाकिस्तान 136वें स्थान पर है.

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