मैन बुकर पुरस्‍कार 2018

वर्ष 2018 का मैन बुकर पुरस्‍कार आयरलैंड की एना बर्न्स को

उत्‍तरी आयरलैण्‍ड की एना बर्न्स को वर्ष 2018 मैन बुकर पुरस्‍कार दिया जायेगा. उन्हें यह पुरस्कार उनके उपन्‍यास ‘मिल्‍कमैन’ के लिए दिया गया है. 2013 के बाद यह पुरस्‍कार जीतने वाली वे पहली महिला लेखक हैं. मिल्‍कमैन उपन्‍यास में उत्‍तरी आयरलैण्‍ड में तीस वर्ष की जातीय हिंसा की कहानी एक युवती की जुबानी है. उपन्‍यास में मध्‍यम वर्ग की एक नर्स का संघर्ष चित्रित किया गया है, जो अफवाहों,  सामाजिक और राजनीतिक दबावों से जूझती है.

 

 

 

 

 

 

बुकर पुरस्‍कार: एक दृष्टि

  • बुकर पुरस्‍कार के पूरा नाम ‘मैन बुकर पुरस्कार फ़ॉर फ़िक्शन’ (Man Booker Prize for Fiction) है.
  • बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी.
  • यह पुरस्‍कार राष्ट्रमंडल (कॉमनवैल्थ) या आयरलैंड के नागरिक द्वारा लिखे गए मौलिक अंग्रेजी उपन्यास के लिए हर वर्ष दिया जाता है.
  • बुकर पुरस्कार विजेता को 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है.
  • पहला बुकर पुरस्कार इंगलैंड के उपन्यासकार पी एच नेवई (P. H. Newby) को ‘Something to Answer For’ के लिए दिया गया था.

 

बुकर पुरस्‍कार पाने वाले भारतीय: एक दृष्टि

कुल 5 बार यह पुरस्कार भारतीय मूल के लेखकों को मिला है. ये लेखक हैं- वी एस नाइपॉल, अरुंधति राय, सलमान रश्दी, किरण देसाई और अरविन्द अडिग.

लेखक उपन्यास वर्ष
1. वी एस नाइपॉल इन ए फ़्री स्टेट 1971
2. सलमान रश्दी मिडनाइट्स चिल्ड्रेन 1981
3. अरुंधति राय द गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स 1997
4. किरण देसाई द इनहैरिटैंस ऑफ लॉस 2006
5. अरविन्द अडिग द व्हाइट टाइगर 2008

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